Journey Deep Within
सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै II
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा II
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥